अंकिता भंडारी हत्याकांड से दुष्यंत कुमार का नाम जोड़ने पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, 24 घंटे में सोशल मीडिया कंटेंट हटाने के निर्देश

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]

नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अंकिता भंडारी हत्याकांड से दुष्यंत कुमार गौतम का नाम जोड़ने वाली कथित मानहानिकारक सामग्री को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने कांग्रेस, आम आदमी पार्टी समेत अन्य प्रतिवादियों को निर्देश दिए हैं कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से ऐसी सभी पोस्ट, वीडियो और प्रकाशन 24 घंटे के भीतर हटाएं, जिनमें गौतम को इस हत्याकांड से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस मिनी पुष्करणा ने कहा कि प्रथम दृष्टया वादी के पक्ष में मामला बनता है और यदि इस तरह की सामग्री पर रोक नहीं लगाई गई, तो दुष्यंत गौतम को अपूरणीय क्षति हो सकती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में भी किसी भी माध्यम से प्रतिवादी ऐसी सामग्री का प्रकाशन या प्रसार नहीं करेंगे, जिसमें सीधे या परोक्ष रूप से गौतम का नाम अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ा जाए।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से कंटेंट हटाने का आदेश

अदालत ने Indian National Congress, Aam Aadmi Party, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस समिति, उर्मिला सनावर, सुरेश राठौर सहित अन्य प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व में ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म्स से संबंधित पोस्ट और वीडियो तय समयसीमा में हटाएं।
न्यायालय ने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर आदेश का पालन नहीं किया गया, तो सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को सीधे तौर पर सामग्री हटाने के निर्देश दिए जाएंगे।

भविष्य में भी ऐसी सामग्री पर रोक

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि आगे चलकर इसी तरह की कोई समान या आपत्तिजनक सामग्री सामने आती है, तो वादी सीधे सोशल मीडिया मंचों को इसकी सूचना दे सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर दोबारा न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

बिना सबूत बदनाम करने का आरोप

दुष्यंत गौतम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत में दलील दी कि एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल और लाखों फॉलोअर्स वाले व्यक्तियों द्वारा बिना किसी ठोस प्रमाण के लगाए गए आरोपों से उनके मुवक्किल की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो एफआईआर में और न ही जांच से जुड़े किसी भी आधिकारिक रिकॉर्ड में दुष्यंत गौतम का नाम है, इसके बावजूद उन्हें जानबूझकर एक गंभीर अपराध से जोड़ा गया।

“विशेष व्यक्ति” बताकर लगाए गए आरोप

भाटिया ने अदालत को बताया कि कुछ वीडियो और बयानों में यह संकेत देने की कोशिश की गई कि अंकिता भंडारी से कथित “विशेष सेवा” की मांग दुष्यंत गौतम के लिए की जा रही थी और इसी कारण उसकी हत्या हुई। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार, अश्लील और मानहानिकारक करार दिया।
उनका कहना था कि यदि किसी के पास कोई प्रमाण था, तो उसे कानून के तहत शिकायत दर्ज करानी चाहिए थी, न कि सोशल मीडिया के माध्यम से किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई जाती।

सोशल मीडिया कंपनियों का पक्ष

सोशल मीडिया मंचों की ओर से पेश वकील ने अदालत को अवगत कराया कि प्लेटफॉर्म्स इस विवाद में किसी पक्ष का समर्थन नहीं कर रहे हैं और न्यायालय के आदेशों का पूरी तरह पालन करेंगे। हालांकि, उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक पहलुओं पर भी ध्यान देने का अनुरोध किया।

अंकिता भंडारी मामला: पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि अंकिता भंडारी वर्ष 2022 में उत्तराखंड के ऋषिकेश क्षेत्र से लापता हुई थी, बाद में उसकी हत्या का खुलासा हुआ। इस मामले में वर्ष 2025 में निचली अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
दुष्यंत गौतम लगातार यह कहते रहे हैं कि उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है और उन्हें राजनीतिक लाभ के लिए गलत तरीके से जोड़ा गया। उन्होंने अदालत से मानहानिकारक सामग्री हटाने के साथ-साथ दो करोड़ रुपये के हर्जाने की भी मांग की है।

Uttarakhand Headline
Author: Uttarakhand Headline

Chief Editor . Shankar Datt , Khatima, u.s.nagar , Uttarakhand,262308

Leave a Comment

और पढ़ें

[the_ad_group id="44"]

Read More Articles