ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर बड़े बदलाव की तैयारी: अब कमर्शियल वाहनों के अलग से बनेंगे लाइसेंस, ये रहेगा प्रोसेस

 देहरादून। ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर देश भर में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब एक बार फिर से व्यावसायिक वाहनों के संचालन को अलग लाइसेंस बनाए जाएंगे। व्यावसायिक वाहनों की श्रेणी के हिसाब से एक वर्ष के अनुभव पर दूसरा लाइसेंस बनेगा।

ऐसे में वाहन चालक को भारी वाहन का लाइसेंस बनाने में चार वर्ष तक का समय लगेगा। परिवहन विभाग इस समय ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का कार्य करता है। इसके तहत दो पहिया वाहन, तिपहिया वाहन, चौपहिया वाहन आदि श्रेणी में अलग-अलग लाइसेंस बनाए जाते हैं। पहले व्यावसायिक वाहनों के अलग लाइसेंस बनाए जाते थे।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय के बाद साढ़े सात टन तक कुल भार वाहन चलाने के लिए अलग व्यावसायिक लाइसेंस बनने बंद हो गए। हालांकि, मध्यम व भारी माल वाहनों के लाइसेंस अभी भी बन रहे हैं।

हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस विषय पर मंथन हुआ। बैठक में वाहनों की बढ़ती दुर्घटना का एक प्रमुख कारण अनुभवहीन वाहन चालकों द्वारा वाहन संचालन भी माना गया। इस पर यह निर्णय लिया गया कि एमवी एक्ट में दोबारा संशोधन किया जाएगा।

इसके तहत पहले वर्ष जिस वाहन चालक के पास एक वर्ष से सामान्य चौपहिया लाइसेंस होगा, उसका ही सामान्य व्यावसायिक वाहन लाइसेंस बनेगा। व्यावसायिक वाहन लाइसेंस के एक वर्ष की अवधि पूरा होने पर मध्यम भार वाहन का लाइसेंस बनेगी।

इस लाइसेंस की अवधि को एक वर्ष गुजरने के बाद ही भारी वाहन का लाइसेंस बनाया जाएगा। हालांकि, जिनके पास पहले से ही मध्यम व भारी वाहनों के लाइसेंस हैं, उन्हें नए सिरे से लाइसेंस बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इस बैठक में उत्तराखंड की ओर से अपर परिवहन आयुक्त एसके सिंह भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि बैठक में व्यावसायिक श्रेणी के अलग से लाइसेंस बनने में सहमति बनी है। इसके लिए एमवी एक्ट में संशोधन प्रस्तावित है।

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Author: Uttarakhand Headline

Chief Editor . Shankar Datt , Khatima, u.s.nagar , Uttarakhand,262308

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