प्रिंस चौक के एसटीडी बूथ पर किया काम, कांग्रेस कार्यकर्ता की पैरवी पर यमुना कॉलोनी स्थित आवास में मिली थी नौकरी; जेनी और हरक सिंह रावत ने सुनाई अलग-अलग कहानी
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में करीब 23 साल पुराने चर्चित जेनी प्रकरण ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। इस मामले की मुख्य पात्र जेनी (इन्द्राणी देवड़ी) मूल रूप से असम की रहने वाली हैं। वह वर्ष 2002 में मॉडलिंग में करियर बनाने के उद्देश्य से देहरादून आई थीं। वर्तमान में वह असम में अपने परिवार के साथ रह रही हैं। जेनी का दावा है कि उनका एक बेटा है और वह उसे उसके पिता का नाम दिलाने तथा न्याय पाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं।
जेनी के मुताबिक, वह अक्टूबर 2002 में मॉडलिंग के क्षेत्र में करियर बनाने की उम्मीद लेकर देहरादून पहुंची थीं। उस समय उनकी उम्र महज 16 से 17 वर्ष के बीच थी। हालांकि, देहरादून में उन्हें मॉडलिंग का काम नहीं मिल पाया। इसके बाद आजीविका चलाने के लिए उन्होंने प्रिंस चौक स्थित एक एसटीडी बूथ पर काम करना शुरू कर दिया।
कांग्रेस कार्यकर्ता की पैरवी पर हरक सिंह रावत के आवास पर मिली नौकरी
जेनी ने बताया कि एसटीडी बूथ पर काम करने के दौरान वहां एक कांग्रेस कार्यकर्ता फोन करने आया करता था। उन्होंने उससे अपने लिए कोई काम दिलाने की गुहार लगाई। इसके बाद उक्त कार्यकर्ता की पैरवी पर उन्हें तत्कालीन कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के आवास पर काम मिल गया।
जेनी के अनुसार, इसके बाद वह यमुना कॉलोनी स्थित हरक सिंह रावत के सरकारी आवास पर रहने लगीं। यहीं से उनके जीवन में ऐसी घटनाओं की शुरुआत हुई, जो वर्षों बाद उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़े विवाद का विषय बन गईं।
हरक सिंह रावत ने बताई अलग कहानी
वहीं, पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने इस मामले में अलग पक्ष रखा है। उनका कहना है कि टिहरी की तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष बीना सजवाण के साथ धनीलाल शाह और अनिल गुप्ता जेनी को उनके पास लेकर आए थे। इन लोगों ने उनसे जेनी को काम पर रखने का अनुरोध किया था।
हरक सिंह रावत के मुताबिक, जेनी के पास रहने का कोई ठिकाना नहीं था, इसलिए वह दो दिन तक उनके आवास पर रही थीं। इसके बाद उन्होंने उसे नारी निकेतन भेज दिया था।
इस तरह करीब 23 साल पुराने इस प्रकरण को लेकर जेनी और हरक सिंह रावत के दावों में स्पष्ट अंतर सामने आता है। अब जेनी की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग उठाए जाने के बाद यह प्रकरण एक बार फिर प्रदेश की सियासत में चर्चा का विषय बन गया है।








