देहरादून में 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन का शुभारंभ, 1,000 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा; 260 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत
देहरादून, 25 अक्टूबर। उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहा है। वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी प्रगति के माध्यम से राज्य की विभिन्न समस्याओं का समाधान खोजने के साथ-साथ सतत विकास को नई दिशा दी जा सकती है। यह बात विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने रविवार को देहरादून स्थित विज्ञान धाम में आयोजित 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC-2026) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कही।
उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) की ओर से आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से राज्य एवं देश की प्रमुख चुनौतियों के समाधान पर मंथन करना है। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो संदेश के माध्यम से प्रतिभागियों को संबोधित किया।
कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान को समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना समय की मांग है। प्रत्येक क्षेत्र की समस्याओं की पहचान कर उनके वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समाधान विकसित किए जाने चाहिए। उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग, अनुसंधान को प्रोत्साहन देने और नवाचार को जनहित से जोड़ने पर जोर दिया।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति-2026 पर दी जानकारी
इस अवसर पर यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति-2026 के प्रमुख उद्देश्यों तथा राज्य में वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों के बीच समन्वय, ज्ञान का आदान-प्रदान और अनुसंधान को समाज की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने ‘विज्ञान सेतु’ पहल का उल्लेख करते हुए विज्ञान और समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, वैज्ञानिक उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाने तथा विभिन्न संस्थानों और हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
उद्घाटन सत्र में मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी, सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी), देहरादून की निदेशक डॉ. दर्शना जोशी, विज्ञानशाला के निदेशक केशव आशीष तथा विज्ञान भारती के संगठन मंत्री सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इस दौरान सम्मेलन की सार-संक्षेप पुस्तिका (एब्स्ट्रैक्ट बुक) का विमोचन भी किया गया।
13 तकनीकी प्रभागों में 260 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत
सम्मेलन के प्रथम दिन 13 तकनीकी प्रभागों के अंतर्गत 260 से अधिक शोध-पत्र मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तुतियों के जरिए शोधकर्ताओं को अपने अनुसंधान निष्कर्ष साझा करने, नवीन विचारों पर चर्चा करने और विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के साथ संवाद का अवसर मिला।
तकनीकी सत्रों में कृषि विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान एवं वानिकी, जैव प्रौद्योगिकी, जैव रसायन, सूक्ष्मजीव विज्ञान, रासायनिक विज्ञान, भू-विज्ञान, इंजीनियरिंग विज्ञान, पदार्थ विज्ञान, नैनो प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य एवं पोषण, गणित एवं सांख्यिकी, कंप्यूटर विज्ञान, चिकित्सा एवं औषध विज्ञान, भौतिक विज्ञान, ग्रामीण विज्ञान, विज्ञान एवं समाज तथा प्राणी विज्ञान सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। सम्मेलन में ‘वर्ष का सर्वश्रेष्ठ नवाचारकर्ता’ श्रेणी भी शामिल की गई।
विशेष रूप से उभरती प्रौद्योगिकियों, अंतर्विषयक अनुसंधान, नवाचार आधारित विकास तथा हिमालयी क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों के समाधान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका पर जोर दिया गया।
‘विकसित भारत, सशक्त उत्तराखंड 2047’ पर मंथन
उद्घाटन सत्र के दौरान ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति: विकसित भारत, सशक्त उत्तराखंड 2047’ विषय पर विचार-मंथन सत्र आयोजित किया गया। इसमें राज्य के विकास में वैज्ञानिक अनुसंधान की भूमिका, नवाचार की भावी दिशा तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों को विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
इसके अतिरिक्त विज्ञान संचार तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों और प्रख्यात पत्रकारों ने भाग लिया। वक्ताओं ने वैज्ञानिक अनुसंधान एवं जनसंचार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, जटिल वैज्ञानिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करने और वैज्ञानिक उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
विज्ञान प्रीमियर लीग और ‘लैब ऑन व्हील्स’ ने बढ़ाई सहभागिता
सम्मेलन के अंतर्गत द्वितीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग का भी आयोजन किया गया, जिसमें कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी मुख्य अतिथि रहे। इस पहल का उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि, जिज्ञासा और सहभागिता को बढ़ावा देना है।
इसके साथ ही ‘लैब ऑन व्हील्स’ अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल के माध्यम से वैज्ञानिक प्रयोगों, गतिविधियों और ज्ञान को अधिकाधिक विद्यार्थियों एवं आमजन तक पहुंचाने तथा उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर दिया गया।
60 से अधिक संस्थानों और स्टार्टअप्स ने लगाई प्रदर्शनी
सम्मेलन परिसर में 60 से अधिक वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स की ओर से प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें वैज्ञानिक उपलब्धियों, अनुसंधान परियोजनाओं, तकनीकी नवाचारों और उद्यमशीलता से जुड़े प्रयासों को प्रदर्शित किया गया।
प्रदर्शनी ने शोधकर्ताओं, नवाचारकर्ताओं और संस्थानों को अपने कार्यों को प्रस्तुत करने, विचारों का आदान-प्रदान करने तथा भविष्य में सहयोग की संभावनाएं तलाशने का अवसर प्रदान किया।
हिमालयी चुनौतियों के समाधान में विज्ञान की भूमिका पर जोर
21वां उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन राज्य के वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सम्मेलन में अनुसंधान, शिक्षा, शासन, उद्योग, मीडिया और नवाचार से जुड़े विभिन्न हितधारकों को साझा मंच उपलब्ध कराया गया।
उत्तराखंड के हिमालयी भू-भाग, पर्यावरण संरक्षण, कृषि, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और अन्य क्षेत्रीय आवश्यकताओं से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचार की भूमिका को प्रमुखता दी गई। साथ ही सतत एवं समावेशी विकास के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने तथा अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ने पर बल दिया गया।
आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन में लगभग 1,000 शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, नवाचारकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, उद्यमियों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने सहभागिता की। सम्मेलन के माध्यम से वैज्ञानिक समुदाय और समाज के बीच संवाद को मजबूत करने तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों को राज्य के विकास से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।








